post111

हेल्लो प्यारे प्यारे साथियों.

आप सभी को देवेन्द्र का सप्रेम प्रणाम.

मैं देवेन्द्र आप सभी का हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर स्वागत करता हु एक अद्भुत रोचक जानकारी के साथ.

जानें आखिर क्या है 108 अंक के पीछे छिपा रहस्य

जब भी हम धर्म की चर्चा करते हैं तब 108 अंक का जिक्र ज़रूर होता है। इस अंक को केवल हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि अन्य धर्मों में भी बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मंत्रों का 108 बार जाप करना, इसके लिए 108 मोतियों की माला का उपयोग करना, 108 बार मंदिर की परिक्रमा करना आदि।

आइए जानते हैं क्या है इस संख्या का महत्व

1. भगवान शंकर द्वारा किया जाने वाला अलौकिक नृत्य होता है तांडव। जब भगवान अत्यंत क्रोधित हो जाते हैं तब वो यह नृत्य करते हैं। इस नृत्य में कुल 108 मुद्राएं होती हैं। इतना ही नहीं महादेव के पास कुल 108 गण भी हैं, यही कारण है कि लिंगायत 108 मोतियों वाली माला का उपयोग करते हैं।

2. वृंदावन में 108 गोपियों का जिक्र किया गया है। 108 मनकों के साथ-साथ इन गोपियों के नामों का जाप, जिसे नामजाप कहते हैं को बहुत ही पवित्र और शुभ माना जाता है। श्रीवैष्णव धर्म में विष्णु के 108 दिव्य क्षेत्रों को बताया गया है जिन्हें ‘108 दिव्यदेशम’ कहा जाता है।

3. गंगा नदी जिसे हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है, वह 12 डिग्री के देशांतर और 9 डिग्री के अक्षांश पर फैली हुई है। अगर इन दोनों अंकों को गुना किया जाए तो 108 अंक मिलता है।

4. पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी सूर्य के व्यास के 108 गुना है। इसी प्रकार पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी भी चंद्रमा के व्यास का 108 गुना है।

5. कहते हैं मनुष्य में कुल 108 भावनाएं होती हैं जिसमें से 36 भावनाओं का सम्बन्ध हमारे अतीत से, 36 का सम्बन्ध वर्तमान से और 36 का सम्बन्ध भविष्य से होता है। वहीं दूसरी ओर बौद्ध धर्म में 108 प्रकार के गुण विकसित करने और 108 प्रकार के अवगुणों से बचने के लिए भी मनुष्य को कहा जाता है।

6. जैन धर्म के अनुसार छः प्रकार की इंद्रियां हैं- सुनना, सूंघना, स्वाद, स्पर्श, दृष्टि और चेतना। इन इंद्रियों को उनके द्वारा दी जाने वाली भावनाओं के आधार पर आगे विभाजित किया जा सकता है, यह सुखद, दर्दनाक या तटस्थ है। छः इंद्रियां तीन प्रकार की भावनाएं उत्पत्ति के प्रकार और तीन प्रकार के समय को गुना किया जाएं तो बनता है 108 अंक।

7. रुद्राक्ष की माला में 108 मनके होते हैं, मंत्रों का जाप 108 बार किया जाता है। ईश्वर का नाम 108 बार लेना भी शुभ माना जाता है।

8. तिब्बती बौद्ध धर्म में उपयोग होने वाली माला में 108 मोती हैं और वे इसे अपनी कलाई के चारों ओर बांध कर रखते हैं।

9. जापान के बौद्ध मंदिरों में, घंटों को नए साल का स्वागत करने और पुराने को समाप्त करने के लिए 108 बार बजाया जाता है। यह 108 सांसारिक प्रलोभन से संबंधित है। मनुष्य का लक्ष्य इसे हराकर मोक्ष प्राप्त करना होता है।

10. समुद्र मंथन के समय जब क्षीर सागर पर मंदार पर्वत पर बंधे वासुकि नाग को देवता और असुरों ने अपनी-अपनी ओर खींचा था तब उसमे 54 देव और 54 राक्षस, कुल मिलाकर 108 लोग ही शामिल थे।

11. बोधिसत्व महामती ने भी भगवान् बुद्ध से 108 सवाल पूछे थे। इसके अलावा बौद्ध धर्म 108 निषेधों को भी बताता है। कई बौद्ध मंदिरों में सीढ़ियां भी 108 रखी गई हैं।

12. दान या चंदा देते समय यहूदी पहले 18 से गुणा करते हैं, जिसका संबंध हिब्रू भाषा में चाइ अर्थात, जीवन या जीवित से होता है। 108 अंक भी 18 से गुणा होता है और इस अंक में 1 और 8 दोनों ही संख्याएं होती हैं। ईसाई धर्म की पुस्तक के पहले खंड जिनीसेस में इस बात का उल्लेख मिलता है कि इसाक की मौत 108 वर्ष की उम्र में हुई थी।

13. मार्शल आर्ट की चीनी शाखा, दक्षिण भारत की शाखा के उस सिद्धांत को स्वीकार करती है जो 108 प्रेशर प्वॉइंट्स के होने की बात कहती है।

14. 108 डिग्री फ़ारेनहाइट शरीर का आंतरिक तापमान होता है इससे अधिक गर्म होने के कारण मानव अंग विफल हो सकते हैं।

15. सिख धर्म में ऊन की पवित्र माला है जिसमें 108 गांठें होती हैं।

16. संस्कृत भाषा में 54 वर्णमाला है। इनमें एक स्त्री और दूसरा पुरुष रूप है। दोनों रूपों के अक्षरों की संख्या जुड़कर 108 हो जाती है।

17. खेल और साहित्य जगत में भी 108 अंक को महत्वपूर्ण माना जाता है।

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साथियों,

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उस का रिप्लाई आप को निश्चित मिलेगा.

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इस से आप का तो नॉलेज बढेगा ही बढेगा साथ ही साथ औरो की मदद भी होगी.

जभ औरो की मदद होगी तभ वो सभ आप को दुवाओ में याद रखेंगे.

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तो साथियों, मैं देवेन्द्र आप से बहुत जल्द ही मिलूँगा एक रोचक जानकारी के साथ,

जभ तक के लिए आप सभी बने रहिएगा हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर देवेन्द्र के साथ.

अभ मैं इस पोस्ट से आप सभ की लेता हु इजाजद.

नमस्ते.

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post110

हेल्लो प्यारे साथियों,

मैं देवेन्द्र आप सभी का फिर एक बार तह दिल से स्वागत करता हु.

हाजिर हुआ हु एक रोचक जानकारी के साथ.

जानकारी को पूरी तरह समज कर अपने व्यव्हार में लाना.

इस लिए जरुरी है पोस्ट में अंत तक बने रहना.

ध्यान की पद्धति

प्रश्न – ध्यान की प्रक्रिया कैसे करें, इसके बारे में कुछ बतायेंगे ॽ

उत्तर – ध्यान की प्रक्रिया के लिए शिवपुराण में आवश्यक सूचनाएँ दी गयी है ।

भगवान शंकरने दुर्वासा मुनि से कहा – हे मुनि, मुक्ति के मंदिर के द्वार को खोल देनेवाले ध्यानयोग की विधि मैं तुम्हें सुनाता हूँ, उसे ध्यान से सुनिए । योग की रुचिवाले पुरुष को सबसे पहले गुरुको प्रणाम करते हुए प्रार्थना या मंत्र का आधार लेके प्राणायाम करना चाहिए । पद्मासन, स्वस्तिकासन, वज्रासन या अन्य किसी आसन का सहारा लेकर स्थिर रूप से बैठना चाहिए और उसे मन एवं प्राण को शांत करने का प्रयास करना चाहिए । इन्द्रियों में मन प्रधान है तथा प्रेरणा प्रदान करनेवाला है इसलिए उसे बाह्य विषयों में जाने से रोकना चाहिए । प्राण एवं मन को ब्रह्मरंध्र या भ्रूमध्य में जोड़कर ॐ का उच्चारण करके अंतःकरण को आत्मा में धारण करना चाहिए ।

ध्यानयोग के साधक को निरोगी रहना चाहिए और अल्पाहार करना चाहिए, क्रोध का त्याग करना चाहिए और आत्मा के चिंतन-मनन में दिलचस्पी रखनी चाहिए । वैराग्य को दृढ करने के लिये आत्मा और शरीर के नित्यानित्य का विचार करना चाहिए । शुक्र और रक्त से उत्पन्न होनेवाला, मज्जा, मेद और अस्थि से भरा हुआ, नाडी समूह से घिरा हुआ, नवद्वारयुक्त, मलमूत्र की बदबूवाला, जन्म-मरण व व्याधि से ग्रसित शरीर अनित्य है । इसलिए उसमें प्रीति और आसक्ति न करनी चाहिए ।

(शिवपुराण अध्याय ३५)

प्रश्न – ध्यान करते वक्त जिस परमात्मा का ध्यान किया जाता है उससे हम भिन्न हैं ऐसा मानना चाहिए या अभिन्न हैं यह समझना चाहिए ॽ

उत्तर – परमात्मा से अगर आप संपूर्ण भिन्नता रखते हों तो आप उनका ध्यान नहीं कर सकते । उस अवस्था में ध्यान की साधना करने का कोई अर्थ या प्रयोजन नहीं है । ईश्वर-साक्षात्कार के लिए तो ध्यान किया जाता है । उस परमात्मा के साथ आप अभेद एवं एकता की अनुभूति करते हैं फिर ध्यान करने का अर्थ क्या रहेगा ॽ अतएव हकीकत यह है कि जिस परमात्मा का ध्यान किया जाता है उसके साथ ज्ञान की दृष्टि से मूलभूत एकता है ऐसा मानिए । साथ ही व्यावहारिक रूप में अथवा वास्तविक रूप में उस परमात्मा के साथ भिन्नता का स्वीकार भी कीजिए । ध्यान मार्ग का साधक वर्तमान भेदभाव का स्वीकार करके ही उसको मिटाने के लिए प्रयत्न करता है और उसमें आगे बढ़ता है । उस भेदभाव को मिटाने पर ही और अभेद सिध्ध करने से ही उसको शांति मिलती है । अतएव मेरा अपना मत तो यही है कि परमात्मा के साथ भिन्नता एवं अभिन्नता दोनोंका ख़्याल साधक को रखना चाहिए ।

प्रश्न – ध्यान में मूर्ति या मंत्र का आधार लेना आवश्यक है क्या ॽ

उत्तर – इस प्रश्न का उत्तर ध्यान करने की योग्यता या भूमिका पर अवलंबित है । यदि मूर्ति या मंत्र का आधार लिए बिना मन को स्थिर या शांत बनाया जा सकता है तो उसका आधार लेने की कोई जरूरत नहीं रहती । किन्तु अधिकांश साधक किसी भी प्रकार के आधार के बिना मन को स्थिर नहीं कर सकते इसीलिए आरंभ में किसी मूर्ति या मंत्र का सहारा लेकर आगे बढ़ना उनके लिए जरूरी बन जाता है । फिर भी जिंदगीभर उस आधार की जरूरत नहीं बनी रहती । अन्ततः तो साधक को सभी प्रकार के बाह्य आलंबनों से मुक्ति प्राप्त करनी है और उसे आत्मानंद में तल्लीन हो जाना सीखना है । वह अवस्था प्रयत्नसाध्य है ।

इसी तरह रोचक जानकारी और इसी तरह जादा से जादा वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक का खजाना प्राप्त करने के लिए आप हमारे ब्लॉग से अवश्य जुड़िये.

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साथियों,

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तो साथियों, मैं देवेन्द्र बहुत जल्द ही हाजिर होऊंगा एक रोचक जानकारी के साथ,

जभ तक आप सभ बने रहिएगा अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर देवेन्द्र के साथ.

नमश्कार.

post109

हेल्लो प्यारे प्यारे साथियों,

आप सभी को देवेन्द्र का सप्रेम नमश्कार.

स्वागत है आप सभी का हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर एक अद्भुत धमाकेदार वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ.

चलिए साथियों, मैं देवेन्द्र, आप का वक्त जादा ना लेते हुए आज के ट्रिक की ओर बढता हु.

Vedic square tricks

Series 7

साथियों, हम ने पिछले पोस्ट में ये जाना था की, किसी भी ३दिजित के नंबर का square कैसे किया जाए. आज के इस पोस्ट में हम ये देखेंगे की, ५०० से आस पास वाले नंबर्स का वर्ग करने का अनोखा जादू.

उम्मीद है आप से, इस जादुई ट्रिक को समजने के लिए पोस्ट में अंत तक बने रहिएगा.

आइये साथियों, कुछ उदाहर्नो की मदद से इस जादुई ट्रिक को समजते है.

Ex. 1

(४८३)^२

विधि:

  1. ४८३ ये ५०० से १७ कम है इस लिए हम ४८३ में से १७ घटाएंगे.

मतलब ४८३-१७ = ४६६

  • हमारा आधार ५०० होने के कारन जो उत्तर हमें प्राप्त हुआ है उसे ५०० से गुना करेंगे.

मतलब ४६६*५०० = २३३०००

  • २३३००० ये हमारे उत्तर का पहला भाग आया.
  • दूसरा पार्ट मतलब = -१७. (-१७)^२ = २८९
  • दोनों को आपस में जोड़ दीजिये. २३३०००+२८९ = २३३२८९
  • इस प्रकार (४८३)^२ = २३३२८९

Ex. 2

(4९७)^२

४९७ ये ५०० से ३ कम है इस लिए.

४९७ = ५००-३

पहला पार्ट = (४९७-३)/२

= २४७

दूसरा पार्ट (-३)^२ = ९

हमारे नियम के मुताबित अगर पहला पार्ट तिन अंको में हो तो दूसरा पार्ट भी तिन अंको में ही होना चाहिए.

इस लिए दूसरा पार्ट = ००९

अभ दोनों पार्ट को हम एक साथ लिखेंगे.

= २४७००९

इस लिए (४९७)^२ = २४७००९

Ex. 3

(५२६)^२

५२६ ये ५०० से २६ जादा है.

इस लिए ५२६ = ५००+२६

पहला पार्ट = (५२६+२६)*५००

= २७६०००

दूसरा पार्ट = (२६)^२

= ६७६

अभ हम दोनों पार्ट को आपस में जोड़ते है.

२७६०००+६७६

= २७६५७६

इस लिए (५२६^२

= २७६५७६

Ex. 4

(५०९)^२

५०९ ये ५०० से ९ जादा है.

इस लिए ५०९ = ५००+९

पहला पार्ट = (५०९+९)/२

= २५९

दूसरा पार्ट = (९)^२ = ०८१

अभ हम दोनों पार्ट को एकत्रित लिखते है.

= २५९०८१

इस लिए (५०९)^२

= २५९०८१

Note: उपर्युक्त बताए गए दोनों में से कोई भी तरीका अपना सखते है.

इसी तरह जादा से जादा वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक का खजाना प्राप्त करने के लिए आप हमारे ब्लॉग से अवश्य जुड़िये.

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साथियों,

आप को ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे जरुर like कीजिये.

आप का कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमें जरुर कमेंट कीजिये.

उस का रिप्लाई आप को निश्चित मिलेगा.

इस पोस्ट को आप जितना हो सखे उतना प्लीज प्लीज प्लीज  शेयर कीजिये. व्हात्सप, फेसबुक. इन्स्ताग्राम, ट्विटर आदि पर.

इस से आप का तो नॉलेज बढेगा ही बढेगा साथ ही साथ औरो की मदद भी होगी.

जभ औरो की मदद होगी तभ वो सभ आप को दुवाओ में याद रखेंगे.

आप अपने क्वेरी का समाधान ईमेल और व्हात्सप्प के जरिये प्राप्त कर सखते है.

ईमेल: (devendramaytree999888@gmail.com)

व्हात्सप्प पर आप (८६९१८५८५२४) इस नंबर पर आप का नाम और आप जिस शहर से बात कर रहे है वो बता कर अपनी क्वेरी रख दीजियेगा.

तो साथियों, मैं देवेन्द्र आप से बहुत जल्द ही मिलूँगा एक जादुई वैदिक मैथ्स की जादुई ट्रिक के साथ,

जभ तक आप बने रहियेगा हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर देवेन्द्र के साथ.

प्रणाम.

post108

हेल्लो प्यारे प्यारे साथियों,

आप सभी को देवेन्द्र का सप्रेम प्रणाम.

स्वागत है आप सभी का हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर एक अद्भुत धमाकेदार वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ.

साथियों, आज के इस पोस्ट में भी उतना ही मजा आनेवाला है जितना आप को पिछले पोस्ट में आया था.

Square Vedic tricks

Series 6

नमश्कार साथियों,

मैं देवेन्द्र आप सभी के लिए इस पोस्ट में एक अलग प्रकार का जादू लेकर आया हु जिस की मदद से आप किसी भी ३दिजित के नंबर का वर्ग square ज्ञात कर सखते हो.

फिर आइये, देर किस बात की. हम अपने उस जादुई ट्रिक की ओर बड़ते है.

Ex. 1

(७३४)^२

७३४ में ७, ३, और ४ ये डिजिट्स है.

Step1

पहले डिजिट का वर्ग कीजिये.

(७)^२

= ४९

Step2

पहले और दुसरे डिजिट का गुना कर के उसे दुगना कीजिये, और जो उत्तर आया वो ४९ में जोड़े.

२(७*३)

= ४२

४९+४२ का ४, और २ जैसे का तैसे

मतलब हमारा नंबर हुआ

= ५३२

Step3

पहले और तीसरे डिजिट का गुना कर के दुगना कीजिये. और जो उत्तर आया उसे ५३२ में मिलाए.

२(७*४)

= ५६

५३२+५६ का ५, और ६ जैसे का तैसे.

मतलब हमारा नंबर हुआ

= ५३७६

Step4

बिच के नंबर का वर्ग कर के ५३७६ में जोड़े.

(३)^२

= ९

५३७६+९

= ५३८५

Step5

दुसरे और तीसरे डिजिट का गुना करके उस का डबल कीजिये और ५३८५ में जोड़े.

2(3*4)

= 24

५३८५+२४ का २, और ४ जैसे का तैसे.

मतलब हमारा नंबर हुआ

= ५३८७४

Step6

तीसरे डिजिट का वर्ग कर के ५३८७४ में जोड़ दीजिये.

(4)^2

= 16

५३८७४+१६ का १, और ६ जैसे का तैसे.

= ५३८७५६

इस लिए (७३४)^२

= ५३८७५६

अभ आप सोच रहे होंगे की, वैदिक मैथ्स में भी इतना लम्बा चौड़ा स्टेप्स है.

नही, ऐसा बिलकू नही.

आप को मैं ने सभी स्टेप्स बिना किसी confusion के बहुत बहुत आसान शब्दों में संजय है.

मैं आप से हमेशा जैसे कहता हु की practice can be make perfect.

१५ से २० सवाल आप खुद हल कीजिये आप को मैं गारेंटी देता हु की, आप कंप्यूटर से भी तेज सवाल हल कर पाओगे.

साथियों, अभ मैं ने आप को समजने के लिए इतना जो लिखा उसे आप को 1 line में क्लियर करता हु.

हमारे पास तिन डिजिट में पहला डिजिट a दूसरा डिजिट b और तीसरा डिजिट c होगा.

फार्मूला हमारा कुछ इस प्रकार होगा.

a^2+2ab+2ac+b^2+2bc+c^2

ex. 2

(९८९)^२

साथियों, अभ हम हमारे फार्मूला के मुताबित हल करते है.

Part1

A^2

(९)^२

= ८१

Part2

2ab

२(९*८)

= १४४

Part3

A^2+2ab

८१+१४४ का १४, और ४ जैसे का तैसे.

हमें नंबर मिला

= ९५४

Part4

2ac+b^2

२(९*९)+(८)^२

= १६२+६४

= २२६

Part5

A^2+2ab+2ac+b^2

९५४+२२६ का २२, और ६ जैसे का तैसे.

हमें नंबर मिला

= ९७६६

Part6

2bc

२(८*९)

= १४४

Part7

A^2+2ab+2ac+b^2+2bc

९७६६+१४४ का १४, और ४ जैसे का तैसे.

हमें नंबर मिला

= ९७८०४

Part8

C^2

(९)^२

= ८१

Part9

A^2+2ab+2ac+b^2+2bc+c^2

९७८०४+८१ का ८, और १ जैसे का तैसे.

हमें नंबर मिला

= ९७८१२१

इस लिए (९८९)^२

= ९७८१२१

देखा ना साथियों,

क्या जबरदस्त ट्रिक है.

Ex. 3

(६७८)^२

(६)^२

= ३६

२(६*७)

= ८४

३६+८४ का ८, और ४ जैसे का तैसे.

= ४४४

२(६*८)

= ९६

४४४+९६ का ९, और ६ जैसे का तैसे

= ४५३६

(७)^२

= ४९

४५३६+४९

= ४५८५

२(७*८)

= ११२

४५८५+११२ का ११, और २ जैसे का तैसे

= ४५९६२

(८)^२

= ६४

४५९६२+६४ का ६, और ४ जैसे का तैसे.

= ४५९६८४

इस लिए (६७८)^२

= ४५९६८४

क्या साथियों?

मजा आया की नही?

मुजे तो आप को सिखाते सिखाते बहुत बहुत बहुत मजा आया.

मुजे उम्मीद है आप को ये पोस्ट बहुत बहुत अच्छी लगी होगी.

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तो साथियों, फिर मिलता हु मैं आप से बहुत जल्द से जल्द एक चमत्कारिक वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ,

जभ तक के लिए आप सभी बने रहिये हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर देवेन्द्र के साथ.

प्रणाम.

post107

हेल्लो प्यारे प्यारे साथियों,

आप सभी को देवेन्द्र का सप्रेम प्रणाम.

स्वागत है आप सभी का हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर एक अध्बुत धमाकेदार वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ.

आज के इस पोस्ट में भी हम वर्ग करने के अनोखे जादू के बारे में जानेंगे.

Square Vedic tricks

Series 5

साथियों, आज के इस पोस्ट में हम ये जानेंगे, वर्ग करने का जादू कुछ इस प्रकार के नंबर के साथ होगा जो १०० से पास हो और १०० से जादा हो.

आइये साथियों, हम कुछ उदाहर्नो द्वारा इस वर्ग करने के अनोखे जादू के बारे में समजते है.

Ex. 1

(११७)^२

११७ = (१००+१७)

इस लिए (११७+१७)

= १३४

इस लिए पहला पार्ट = १३४

+१७ का वर्ग = २८९

पहला पार्ट = १३४+२८९ का २

= १३६

दूसरा पार्ट = ८९

अभ दोनों पार्ट को एकत्रित लिखते है.

= १३६८९

इस लिए (११७)^२ = १३६८९

Ex. 2

(१२८)^२

१२८ = (१००+२८)

इस लिए (१२८+२८)

= १५६

पहला पार्ट = १५६

+२८ का वर्ग = ७८४

पहला पार्ट = १५६+७८४ का ७

= १६३

दूसरा पार्ट = ८४

अभ दोनों पार्ट को हम एक साथ लिखेंगे.

= १६३८४

इस लिए (१२८)^२

= १६३८४

Ex. 3

(१०७)^२

१०७ = (१००+७)

इस लिए (१०७+७)

= ११४

इस लिए पहला पार्ट

= ११४

०७ का वर्ग

= ४९

इस लिए दूसरा पार्ट

= ४९

अभ हम दोनों पार्ट को एकत्रित करते है.

= ११४४९

इस लिए (१०७)^२

= ११४४९

Ex. 4

(१३७)^२

दिया हुआ नंबर १०० से ३७ अधिक है.

इस लिए

१३७ = (१००+३७)

इस लिए (१३७+३७)

= १७४

मतलब हमारा पहला पार्ट हुआ

= १७४

+३७ का वर्ग

= १३६९

पहला पार्ट

= १७४+१३६९ का १३

= १८७

और दूसरा पार्ट = ६९

(अभ हम दोनों पार्ट को एकत्रित कर के लिखेंगे.)

= १८७६९

इस लिए (१३७)^२

= १८७६९

Ex. 5

(१२३)^२

१२३ = (१००+२३)

इस लिए

(१२३+२३)

= १४६

+२३ का वर्ग

= ५२९

पहला पार्ट

= १४६+५२९ का ५

= १५१

दूसरा पार्ट = २९

अभ दोनों पार्ट्स को एक साथ लिखने के बाद

= १५१२९

इस लिए (१२३)^२

= १५१२९

क्या साथियों,

मजा आया?

मुजे तो आप को पढ़ाते हुए इतना मजा आ रहा है

क्या कहू?

मुजे विशवास ही नही बल्कि मुजे पूरी तरह से उम्मीद है, आप को ये वर्ग करने का जादू जरुर पसंद आया होगा

इसी तरह जादा से जादा वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक का खजाना प्राप्त करने के लिए आप हमारे ब्लॉग से अवश्य जुड़िये.

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साथियों,

आप को ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे जरुर like कीजिये.

आप का कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमें जरुर कमेंट कीजिये.

उस का रिप्लाई आप को निश्चित मिलेगा.

इस पोस्ट को आप जितना हो सखे उतना प्लीज प्लीज प्लीज  शेयर कीजिये. व्हात्सप, फेसबुक. इन्स्ताग्राम, ट्विटर आदि पर.

इस से आप का तो नॉलेज बढेगा ही बढेगा साथ ही साथ औरो की मदद भी होगी.

जभ औरो की मदद होगी तभ वो सभ आप को दुवाओ में याद रखेंगे.

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व्हात्सप्प पर आप (८६९१८५८५२४) इस नंबर पर आप का नाम और आप जिस शहर से बात कर रहे है वो बता कर अपनी क्वेरी रख दीजियेगा.

आइये साथियों, एक छोटीसी कविता के द्वारा हम हमारे बचपन पर प्रकाश डालते है.

बचपन की यादें

बचपन की यादें

मेरी आँखों से गुजरी जो

बीते लम्हों की परछाईं,

न फिर रोके रुकी ये आँखें

झट से भर आयीं।

वो बचपन गुजरा था जो

घर के आंगन में लुढ़कता सा

मैं भीगा करता था जिसमें

वो सावन बरसता सा,

याद आई मुझे

माँ ने थी जों कभी लोरियां गाई

न फिर रोके रुकी ये आँखें

झट से भर आयीं।

उम्र छोटी थी पर सपने

बड़े हम देखा करते थे

ये दुनिया प्यारी न थी

हम तो बस खिलौनों पे मरते थे,

जब देखा मैंने वो बचपन का खजाना

किताब, कलम और स्याही

न फिर रोके रुकी ये आँखें

झट से भर आयीं।

याद आया मुझे

भाई-बहनों के संग झगड़ना

शैतानियाँ कर के माँ के

दमन से जा लिपटना,

साथ ही याद आई वो बातें

जो माँ ने थी समझाई

न फिर रोके रुकी ये आँखें

झट से भर आयीं।

आज तन्हाई में जब

वो मासूम बचपन नजर आया है

ऐसा लगता है जैसे

खुशियों ने कोई गीत गुनगुनाया है,

पर जब दिखा सच्चाई का आइना

तो फिर हुयी रुसवाई

न फिर रोके रुकी ये आँखें

झट से भर आयीं।

तो साथियों, मैं बहुत जल्द से जल्द लौटूंगा हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours ब्लॉग पर एक चमत्कारिक वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ,

जभ तक के लिए आप सभी बने रहिएगा हमारे अपने numerically yours इस ब्लॉग पर देवेन्द्र के साथ.

प्रणाम

post106

हेल्लो प्यारे प्यारे साथियों,

स्वागत है आप सभी का  हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर एक रोचक जानकारी के साथ

मानवी शरीर को चलानेवाली पंच्शक्ति की जानकारी

पंच तत्वों के द्वारा इस समस्त सृष्टि का निर्माण हुआ है।

मनुष्य का शरीर भी पाँच तत्वों से ही बना हुआ है। इन तत्वों का जब तक शरीर में उचित भाग रहता है तब तक स्वस्थता रहती है। जब कमी आने लगती है तो शरीर निर्बल, निस्तेज, आलसी, अशक्त तथा रोगी रहने लगता है। स्वास्थ्य को कायम रखने के लिए यह आवश्यक है कि तत्वों को उचित मात्रा में शरीर में रखने का हम निरंतर प्रयत्न करते रहें और जो कमी आवे उसे पूरा करते रहें। नीचे कुछ ऐसे अभ्यास बताये जाते हैं जिनको करते रहने से शरीर में तत्वों की जो कमी हो जाती है उसकी पूर्ति होती रह सकती है और मनुष्य अपने स्वास्थ्य को अच्छा बनाये रहते हुए दीर्घ जीवन प्राप्त कर सकता है।

पृथ्वी ( भूमि) तत्व-

पृथ्वी तत्व में विषों को खींचने की अद्भुत शक्ति है। मिट्टी की टिकिया बाँध कर फोड़े तथा अन्य अनेक रोग दूर किये जा सकते हैं। पृथ्वी में से एक प्रकार की गैस हर समय निकलती रहती है। इसको शरीर में आकर्षित करना बहुत लाभदायक है।

प्रतिदिन प्रातःकाल नंगे पैर टहलने से पैर और पृथ्वी का संयोग होता है। उससे पैरों के द्वारा शरीर के विष खिच कर जमीन में चले जाते हैं और ब्राह्ममुहूर्त में जो अनेक आश्चर्यजनक गुणों से युक्त वायु पृथ्वी में से निकलती है उसको शरीर सोख लेता है। प्रातःकाल के सिवाय यह लाभ और किसी समय में प्राप्त नहीं हो सकता। अन्य समयों में तो पृथ्वी से हानिकारक वायु भी निकलती है जिससे बचने के लिए जूता आदि पहनने की जरूरत होती है।

प्रातःकाल नंगे पैर टहलने के लिए कोई स्वच्छ जगह तलाश करनी चाहिए। हरी घास भी वहाँ हो तो और भी अच्छा। घास के ऊपर जमी हुई नमी पैरों को ठंडा करती है। वह ठंडक मस्तिष्क तक पहुँचती है। किसी बगीचे, पार्क, खेल या अन्य ऐसे ही साफ स्थान में प्रति दिन नंगे पाँवों कम से कम आधा घंटा नित्य टहलना चाहिए। साथ ही यह भावना करते चलना चाहिए “पृथ्वी की जीवनी शक्ति को मैं पैरों द्वारा खींच कर अपने शरीर में भर रहा हूँ और मेरे शरीर के विषों को पृथ्वी खींच कर मुझे निर्मल बना रही है।” यह भावना जितनी ही बलवती होगी, उतना ही लाभ अधिक होगा।

हफ्ते में एक दो बार स्वच्छ भुरभुरी पीली मिट्टी या शुद्ध बालू लेकर उसे पानी से गीली करके शरीर पर साबुन को तरह मलना चाहिए। कुछ देर तक उस मिट्टी को शरीर पर लगा रहने देना चाहिए और बाद में स्वच्छ पानी से स्नान करके मिट्टी को पूरी तरह से छुड़ा देना चाहिए। इस मृतिका स्नान से शरीर के भीतरी और चमड़े के विष खिंच जाते हैं और त्वचा कोमल एवं चमकदार बन जाती है।

जल तत्व-

मुरझाई हुई चीजें जल के द्वारा हरी हो जाती हैं। जल में बहुत बड़ी सजीवता है। पौधे में पानी देकर हरा भरा रखा जाता है, इसी प्रकार शरीर को स्नान के द्वारा सजीव रखा जाता है। मैल साफ करना ही स्नान का उद्देश्य नहीं हैं वरन् जल में मिली हुई विद्युत शक्ति, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि अमूल्य तत्वों द्वारा शरीर को सींचना भी है। इसलिए ताजे, स्वच्छ, सह्य ताप के जल से स्नान करना कभी न भूलना चाहिए। वैसे तो सवेरे का स्नान ही सर्वश्रेष्ठ है पर यदि सुविधा न हो तो दोपहर से पहले स्नान जरूर कर लेना चाहिए। मध्याह्न के बाद का स्नान लाभदायक नहीं होता। हाँ गर्मी के दिनों में संध्या को भी स्नान किया जा सकता है।

प्रातःकाल सोकर उठते ही वरुण देवता की उपासना करने का एक तरीका यह है कि कुल्ला करने के बाद स्वच्छ जल का एक गिलास पीया जाए। इसके बाद कुछ देर चारपाई और इधर उधर करवटें बदलनी चाहिए। इसके बाद शौच जाना चाहिए। इस उपासना का वरदान तुरन्त मिलता है। खुल कर शौच होता है और पेट साफ हो जाता है। यह ‘उषापान’ वरुण देवता की प्रत्यक्ष आराधना है।

जब भी आपको पानी पीने की आवश्यकता पड़े, दूध की तरह घूँट घूँट कर पानी पियें। चाहे कैसी ही प्यास लग रही हो एक दम गटापट न पी जाना चाहिए। हर एक घूँट के साथ यह भावना करते जाना चाहिए-”इस अमृत तुल्य जल में जो मधुरता और शक्ति भरी हुई है, उसे मैं खींच रहा हूँ।” इस भावना के साथ पिया हुआ पानी, दूध के समान गुणकारक होता है। पानी पीने में कंजूसी न करनी चाहिए। भोजन करते समय अधिक पानी न पियें इसका ध्यान रखते हुए अन्य किसी भी समय की प्यास को जल द्वारा समुचित रीति से पूरा करना चाहिए। व्रत के दिन तो खास तौर से कई बार काफी मात्रा में पानी पीना चाहिए।

अग्नि तत्व –

जीवन को बढ़ाने ओर विकसित करने का काम अग्नि तत्व का है जिसे गर्मी कहते हैं। गर्मी न हो तो कोई वनस्पति एवं जीव विकसित नहीं हो सकता। गर्मी के केन्द्र सूर्य उपासना और अग्नि उपासना एक ही बात है।

स्नान करके गीले शरीर से ही प्रातःकालीन सूर्य के दर्शन करने चाहिए और जल का अर्घ्य देना चाहिए। पानी में बिजली का बहुत जोर रहता है। बादलों के जल के कारण आकाश में बिजली चमकती है। इलेक्ट्रिसिटी के तारों में भी वर्षा ऋतु में बड़ी तेजी रहती है। पानी में बिजली की गर्मी को खींचने की विशेष शक्ति है। इसलिए शरीर को तौलिया से पोंछने के बाद नम शरीर से ही नंगे बदन सूर्य नारायण के सामने जाकर अर्घ्य देना चाहिए। यदि नदी, तालाब, नहर पास में हो कमर तक जल में खड़े होकर अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य लोटे से भी दिया जा सकता है और अंजलि से भी, जैसी सुविधा हो कर लेना चाहिए। सूर्य के दर्शन के पश्चात् नेत्र बन्द करके उनका ध्यान करना चाहिए और मन ही मन यह भावना दुहरानी चाहिए-”भगवान सूर्य नारायण का तेज मेरे शरीर में प्रवेश करके नस नस को दीप्तिमान सतेज और प्रफुल्लित कर रहे हैं और मेरे अंग प्रत्यंग में स्फूर्ति उत्पन्न हो रही है।” स्नान के बाद इस क्रिया को नित्य करना चाहिए।

हो सके तो रविवार का व्रत भी करना चाहिये। यदि पूरा व्रत न हो सके तो एक समय, बिना नमक का भोजन करने से भी सूर्य का व्रत माना जा सकता है। इससे भी मनोवैज्ञानिक सिद्धान्तों के अनुसार मनुष्य के तेज में वृद्धि होती है और नेत्र रोग, रक्त विकार तथा चर्म रोग विशेष रूप से दूर होते हैं।

वायु तत्व –

शरीर को पोषण करने वाले तत्वों का थोड़ा भाग भोजन से प्राप्त होता है, अधिकाँश भाग की पूर्ति वायु द्वारा होती है। जो वस्तुएं स्थूल हैं वे सूक्ष्म रूप से वायु मंडल में भी भ्रमण करती रहती हैं। योरोप अमेरिका में ऐसी गायें हैं जिनकी खुराक 24 सेर है परन्तु दिन भर में दूध 28 सेर देती हैं। यह दूध केवल स्थूल भोजन से ही नहीं बनता वरन् वायु में घूमने वाले अदृश्य तत्वों के भोजन से भी प्राप्त होता है। बीमार तथा योगी बहुत समय तक बिना खाये पिये भी जीवित रहते हैं। उनका स्थूल भोजन बन्द है तो भी वायु द्वारा बहुत सी खुराकें मिलती रहती हैं। यही कारण है कि वायु द्वारा प्राप्त होने वाले ऑक्सीजन आदि अनेक प्रकार के भोजन बन्द हो जाने पर मनुष्य की क्षण भर में मृत्यु हो जाती है। बिना वायु के जीवन संभव नहीं। आबोहवा का जितना स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है उतना भोजन का नहीं। डॉक्टर लोग क्षय आदि असाध्य रोगियों को पहाड़ों पर जाने की सलाह देते हैं क्योंकि वे समझते हैं कि बढ़िया दवाओं की अपेक्षा उत्तम वायु में अधिक पोषक तत्व मौजूद हैं।

अनन्त आकाश में से वायु द्वारा प्राणप्रद तत्वों को खींचने के लिए भारत के तत्व दर्शी ऋषियों ने प्राणायाम की बहुमूल्य प्रणाली का निर्माण किया है। मोटी बुद्धि से देखने में प्राणायाम एक मामूली सी फेफड़ों की कसरत मालूम पड़ती है और इससे इतना ही लाभ प्रतीत होता है कि फेफड़े मजबूत बनें और रक्त शुद्ध हो किन्तु सूक्ष्म दृष्टि से इस क्रिया द्वारा अनिर्वचनीय लाभ प्रतीत हुए हैं। बात यह है कि प्राणायाम द्वारा अखिल आकाश में से अत्यन्त बहुमूल्य पोषक पदार्थों को खींचकर शरीर को पुष्ट बनाया जा सकता है।

स्नान करने के उपरान्त किसी एकान्त स्थान में जाइए। समतल भूमि पर आसन बिछा कर पद्मासन से बैठ जाइए। मेरुदंड बिलकुल सीधा रहे। नेत्रों को अधखुला रखिए। अब धीरे धीरे नाक द्वारा साँस खींचना आरम्भ कीजिए और दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ भावना कीजिए कि “विश्वव्यापी महान प्राण भण्डार में से मैं स्वास्थ्यदायक प्राणतत्व साँस के साथ खींच रहा हूँ और वह प्राण मेरे रक्त प्रवाह तथा समस्त नाड़ी तन्तुओं में प्रवाहित होता हुआ सूर्यचक्र में (आमाशय का वह स्थान जहाँ पसलियाँ और पेट मिलते हैं) इकट्ठा हो रहा है। इस भावना को ध्यान द्वारा चित्रवत् मूर्तिमान रूप से देखने का प्रयत्न करना चाहिए। जब फेफड़ों को वायु से अच्छी तरह भर लो तो दस सैकिण्ड तक वायु को भीतर रोके रहो। रोकने के समय ऐसा ध्यान करना चाहिए कि “प्राणतत्व मेरे अंग प्रत्यंगों में पूरित हो रहा है।” अब वायु को नासिका द्वारा ही धीरे धीरे बाहर निकालो और निकालते समय ऐसा अनुभव करो कि “शरीर के सारे दोष, रोग और विष वायु के साथ साथ निकाल बाहर किये जा रहे हैं।”

उपरोक्त प्रकार से आरम्भ में दस प्राणायाम करने चाहिए फिर धीरे धीरे बढ़ाकर सुविधानुसार आधे घंटे तक कई बार इन प्राणायामों को किया जा सकता है। अभ्यास पूरा करने के उपरान्त आपको ऐसा अनुभव होगा कि रक्त की गति तीव्र हो गई है और सारे शरीर की नाड़ियों में एक प्रकार की स्फूर्ति, ताजगी और विद्युत शक्ति दौड़ रही है। इस प्राणायाम को कुछ दिन लगातार करने से अनेक शारीरिक और मानसिक लाभों का स्वयं अनुभव होगा।

आकाश तत्व –

आकाश का अर्थ शून्य या पोल समझा जाता है। पर यह शून्य या पोल खाली स्थान नहीं है। ईथर तत्व (Ethar) हर जगह व्याप्त है। इस ईथर को ही आकाश कहते हैं। रेडियो द्वारा ब्रॉडकास्ट किये हुए शब्द ईथर तत्व में लहरों के रूप में चारों ओर फैल जाते हैं। रेडियो यंत्र की सहायता से उन लहरों को पकड़ कर उन शब्दों को दूर दूर स्थानों में भी सुना जाता है। केवल शब्द ही नहीं विचार और विश्वास भी आकाश में (ईथर में) लहरों के रूप में बहते रहते हैं। जैसी ही हमारी मनोभूमि होती है उसी के अनुरूप विचार इकट्ठे होकर हमारे पास आ जाते हैं। एक ही समय में दिल्ली, बम्बई, लाहौर, लन्दन, न्यूयार्क आदि से विभिन्न प्रोग्राम ब्रॉडकास्ट होते हैं परन्तु आपके रेडियो सैट की सुई जिस स्टेशन के नम्बर पर लगी होगी उसी का प्रोग्राम सुनाई पड़ेगा और अन्य प्रोग्राम अपने रास्ते चले जायेंगे। इसी प्रकार हमारी मनोभूमि, रुचि, इच्छा जैसी होती हैं उसी के अनुसार आकाश में से विचार, प्रेरणा और प्रोत्साहन प्राप्त होते हैं। सृष्टि के आदि से लेकर अब तक असंख्य प्राणियों द्वारा जो असंख्य प्रकार के विचार अब तक किये गये हैं वे नष्ट नहीं हुए वरन् अब तक मौजूद हैं, आकाश में उड़ते फिरते हैं। यह विचार अपने अनुरूप भूमि जहाँ देखते हैं वहीं सिमट सिमट कर इकट्ठे होने लगते हैं। कोई व्यक्ति बुरे विचार करता है तो उसी के अनुरूप असंख्य नई बातें उसे अपने आप सूझ पड़ती हैं, इसी प्रकार भले विचारों के बारे में भी है हम जैसी अपनी मनोभूमि बनाते हैं उसी के अनुरूप विचार और विश्वासों का समूह हमारे पास इकट्ठा हो जाता है और यह तो निश्चित ही है कि विचारो की प्रेरणा से ही कार्य होते हैं। जो जैसा सोचता है वह वैसे ही काम भी करने लगता है।

आकाश तत्व में से लाभदायक सद्विचारों को आकर्षित करने के लिए प्राणायाम के बाद का समय ठीक है। एकान्त स्थान में किसी नरम बिछाने पर चित्त होकर लेट जाओ, या आराम कुर्सी पर पड़े रहो अथवा मसंद या दीवार का सहारा लेकर शरीर को बिलकुल ढीला कर दो। नेत्रों को बन्द करके अपने चारों ओर नीले आकाश का ध्यान करो। नीले रंग का ध्यान करना मन को बड़ी शान्ति प्रदान करता है। जब नीले रंग का ध्यान ठीक हो जाए तब ऐसी भावना करनी चाहिए कि ‘निखिल नील आकाश में फैले हुए सद्विचार, सद्विश्वास, सत्प्रभाव चारों ओर से एकत्रित होकर मेरे शरीर में विद्युत किरणों की भाँति प्रवेश कर रहे हैं और उनके प्रभाव से मेरा अन्तःकरण दया, प्रेम, परोपकार, कर्तव्यपरायणता, सेवा, सदाचार, शान्ति, विनय, गंभीरता, प्रसन्नता, उत्साह, साहस, दृढ़ता, विवेक आदि सद्गुणों से भर रहा है।” यह भावना खूब मजबूती और दिलचस्पी के साथ मनोयोग तथा श्रद्धा पूर्वक होनी चाहिए। जितनी ही एकाग्रता और श्रद्धा होगी उतना ही इससे लाभ होगा।

आकाश तत्व की इस साधना के फलस्वरूप अनेक सिद्ध, महात्मा, सत्पुरुष, अवतार तथा देवताओं की शक्तियाँ आकर अपने प्रभाव डालती हैं और मानसिक दुर्गुणों को दूर करके श्रेष्ठतम सद्भावनाओं का बीज जमाती हैं। सद्भावों के कारण ही यह लोक और परलोक आनन्दमय बनता है यह तथ्य बिलकुल निश्चित और स्वयं सिद्ध है।

उपरोक्त पाँच तत्वों की साधनाएं देखने में छोटी और सरल हैं तो भी इनका लाभ अत्यन्त विषद है। नित्य पाँचों तत्वों का जो साधन कर सकते हैं। वे इन सबको करें जो पाँचों को एक साथ न कर सकते हों वे एक एक दो दो करके किया करें। कौन सा साधन पहले कौन सा पीछे यह भी अपनी अपनी सुविधा के ऊपर निर्भर है। जिन्हें प्रतिदिन करने की सुविधा न हो वे सप्ताह में एक दो दिन के लिए भी अपना कार्यक्रम निश्चित रूप से चलाने का प्रयत्न करें। रविवार के व्रत के दिन भी इन पाँचों साधनों को पूरा करते रहें तो भी बहुत लाभ होगा। नित्य प्रति नियमित रूप से अभ्यास करने वालों को तो शारीरिक और मानसिक लाभ इससे बहुत अधिक होता है।

तो साथियों, आप को ये जानकारी कैसे लगी?

मुजे पूरी उम्मीद है आप को ये जानकारी बहुत पसंद आई होगी.

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साथियों,

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जभ औरो की मदद होगी तभ वो सभ आप को दुवाओ में याद रखेंगे.

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साथियों, मैं देवेन्द्र आप से बहुत जल्द से जल्द मिलूँगा एक रोचक जानकारी के साथ,

जभ तक आप सभी बने रहिएगा हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर देवेन्द्र के साथ.

प्रणाम

post105

हेल्लो प्यारे प्यारे साथियों,

आप  सभी को देवेन्द्र का सप्र्मे नमश्कार.

स्वागत है आप सभी का हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर एक अद्भुत चमत्कारिक वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ.

आइये साथियों, आप का वक्त जादा ना लेते हुए हम आज के ट्रिक की ओर बड़ते है.

Square Vedic tricks

Series 4

साथियों, हम आज के इस पोस्ट में ये देखेंगे की, ऐसे नंबर का वर्ग करने का जादू जो १०० के पास हो और १०० से कम हो.

आइये साथियों, हम कुछ उदाहर्नो द्वारा इस जादू को समजते है.

Ex. 1

(८८)^२

८८ ये १०० से १२ कम है.

इस लिए १००-१२

= ८८

८८ ये १०० से १२ कम है इस लिए ८८ में से १२ कम कीजिये.

८८-१२

= ७६

ये अपने उत्तर का पहला पार्ट है.

-१२ का वर्ग = १४४

हम ने जैसा की अभ तक देखा की, हमारा पहला पार्ट जितने डिजिट्स में हो उतने ही पार्ट में दूसरा पार्ट लिखना है.

तो अपना पहला पार्ट होगा = ७६+१४४ का १ = ७७

और दूसरा पार्ट होगा = ४४

दोनों पार्ट को हम एकत्रित लिखते है.

= ७७४४

इस लिए (८८)^२ = ७७४४

Ex. 2

(९५)^२

९५ = १००-५

इस लिए ९५-५

= ९०

पहला पार्ट = ९०

-५ का वर्ग = २५

दूसरा पार्ट = २५

दोनों पार्ट को एकत्रित करने के बाद आया

= ९०२५

इस लिए (९५)^२ = ९०२५

Ex. 3

(७७)^२

७७ = १००-२३

इस लिए ७७-२३

= ५४

पहला पार्ट = ५४

०२३ का वर्ग = ५२९

यहाँ पर दूसरा पार्ट पहले पार्ट के तुलना में जादा आया है.

मतलब हमारा पहला पार्ट दो डिजिट का है और दूसरा पार्ट हमारा ३ डिजिट का है.

उसे हम दो डिजिट में रूपांतरित करते है.

पहला पार्ट = ५४+५२९ का ५ = ५९

और दूसरा पार्ट = २९

दोनों पार्ट को हम एकत्रित लिखते है.

= ५९२९

इस लिए (७७)^२ = ५९२९

Ex. 4

(९१)^२

९१ = १००-९

इस लिए ९१-९

= ८२

ये अपने उत्तर का व् पहला पार्ट होगा

पहला पार्ट = ८२

-० का वर्ग = ८१

अभ हम दोनों पार्ट को एकत्रित कर के लिखेंगे.

= ८२८१

इस लिए

 (९१)^२ = ८२८१

क्या साथियों?

कैसा लगा आप को आज का ये जादू?

मुजे पूरा उम्मीद है, आप को ये जादू जरुर पसंद आया होगा

इसी तरह जादा से जादा वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक का खजाना प्राप्त करने के लिए आप हमारे ब्लॉग से अवश्य जुड़िये.

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साथियों,

आप को ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे जरुर like कीजिये.

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इस से आप का तो नॉलेज बढेगा ही बढेगा साथ ही साथ औरो की मदद भी होगी.

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ईमेल: (devendramaytree999888@gmail.com)

व्हात्सप्प पर आप (८६९१८५८५२४) इस नंबर पर आप का नाम और आप जिस शहर से बात कर रहे है वो बता कर अपनी क्वेरी रख दीजियेगा.

तो साथियों,

बहुत जल्द ही मैं देवेन्द्र आप सभी के साथ हाजिर हो कर एक अद्भुत धमाकेदा वैदिक ट्रिक लेकर आनेवाला हु.

जब तक के लिए आप बने  रहिएगा हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours ब्लॉग पर देवेन्द्र के साथ.

प्रणाम

post104

हेल्लो प्यारे साथियों,

आप सभी को देवेन्द्र का प्यारा प्यारा नमश्कार.

स्वागत है आप सभी का हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर एक अध्बुत चमत्कारिक वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ.

साथियों, आज के इस पोस्ट में भी वर्ग करने के जादुई विशेष ट्रिक की यात्रा में लगे हुए है.

Square Vedic tricks

Series 3

साथियों, हम आज देखेंगे की, ५० से आसपास पर ५० से जादा वाले नंबर्स का वर्ग करने का जादू.

आइये, हम कुछ उदाहर्नो द्वारा इस जादू को हम समजते है.

जैसा की हम ने पिछले पोस्ट में आप को बताया था, की ५० के आसपास के नंबर का वर्ग निकालने के लिए हमें २५ ये नंबर से खेलना पड़ता है.

उम्मीद करता हु की ये बात आप को ध्यान में रहेगा.

Ex. 1

(६३)२

६३ = ५०+१३

इस लिए २५+१३

= ३८

३८ ये हमारे उत्तर का पहेला पार्ट हुआ.

+१३ का वर्ग = १६९

जैसा की हम जानते है, पहले पार्ट में यदि दो डिजिट हो तो दुसरे पार्ट में भी दो डिजिट्स ही होना चाहिए.

दूसरा जो हमारा १६९ ये तिन डिजिट्स का पार्ट आया है उसे दो डिजिट में कर लेते है.

मतलब पहला पार्ट ३८+१ = ३९

दूसरा पार्ट = ६९

= ३९६९

इस लिए (६३)२ = ३९६९

Ex. 2

(५२)२

५२ = ५०+२

इस लिए २५+२ = २७

पहला पार्ट = २७

२ का वर्ग = ४

पर हमारा पहला पार्ट दो डिजिट में है इस लिए इसे भी हम दो डिजिट में ही लिखेंगे.

इस लिए दूसरा पार्ट = ०४

अभ हम दोनों पार्ट्स को एकत्रित लिखेंगे.

= २७०४

इस लिए (५२)२ = २७०४

Ex. 3

(५९)२

५९ = ५०+९

इस लिए २५+९ = ३४

पहला पार्ट = ३४

९ का वर्ग = ८१

दूसरा पार्ट = ८१

= ३४८१

इस लिए (५९)२ = ३४८१

Ex. 4

(४९)२

४९ = ५०-१

इस लिए २५-१ = २४

पहला पार्ट = २४

-१ का वर्ग = १

हमारा पहला पार्ट दो डिजिट में है इस लिए हम ०१ लिखेंगे.

दूसरा पार्ट = ०१

= २४०१

इस लिए (४९)२ = २४०१

Ex. 5

(३९)२

३९ = ५०-११

इस लिए २५-११ = १४

पहला पार्ट = १४

-११ का वर्ग = १२१

दूसरा पार्ट = १२१

पहला पार्ट = १४+१ = १५

दूसरा पार्ट = २१

= १५२१

इस लिए (३९)२ = १५२१

क्या साथियों?

कैसी लगी आप को ये मैजिकल ट्रिक?

मुजे पूरी उम्मीद है आप को ये जरुर पसंद आई होगी.

इसी तरह जादा से जादा वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक का खजाना प्राप्त करने के लिए आप हमारे ब्लॉग से अवश्य जुड़िये.

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साथियों,

आप को ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे जरुर like कीजिये.

आप का कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमें जरुर कमेंट कीजिये.

उस का रिप्लाई आप को निश्चित मिलेगा.

इस पोस्ट को आप जितना हो सखे उतना प्लीज प्लीज प्लीज  शेयर कीजिये. व्हात्सप, फेसबुक. इन्स्ताग्राम, ट्विटर आदि पर.

इस से आप का तो नॉलेज बढेगा ही बढेगा साथ ही साथ औरो की मदद भी होगी.

जभ औरो की मदद होगी तभ वो सभ आप को दुवाओ में याद रखेंगे.

आप अपने क्वेरी का समाधान ईमेल और व्हात्सप्प के जरिये प्राप्त कर सखते है.

ईमेल: (devendramaytree999888@gmail.com)

व्हात्सप्प पर आप (८६९१८५८५२४) इस नंबर पर आप का नाम और आप जिस शहर से बात कर रहे है वो बता कर अपनी क्वेरी रख दीजियेगा.

तो साथियों,

मैं आप के लिए बहुत जल्द ही हाजिर होऊंगा हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर एक जादुई वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ,

जभ तक के लिए आप बने रहिये हमारे अपने अपने प्यारे प्यार numerically yours इस ब्लॉग पर देवेन्द्र के साथ.

नमश्कार

post103

हेल्लो प्यारे प्यारे साथियों,

आप सभी को देवेन्द्र का प्यार भरा नमस्कार.

कैसे हो आप?

मुजे पूरी तरह उम्मीद है आप सभ लोग परमात्मा के कृपा से बहुत अच्छे होंगे.

स्वागत है आप सभी का हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर एक अद्भुत चमत्कारिक वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ.

Square Vedic tricks

Series 2

साथियों, आज हम इस पोस्ट में ५० के पास की नंबर्स का वर्ग करने का जादू देखेंगे.

अभ हम देखते है ५० से कम वाली नंबर का वर्ग करने का जादू.

आइये साथियों, हम कुछ उदाहर्नो द्वारा इस जादू को समज लेते है.

Ex. 1

(४७)२

५० के पास वाले नंबर का वर्ग निकालने के लिए आप को एक नंबर पक्का करना होगा. उस से ही आप को खेलना है.

वो नंबर है = २५

४७ ये ५० से ३ कम है इस लिए २५ में से ३ घटा दीजिये.

२५-३ = २२

ये आप के उत्तर का पहला पार्ट हुआ.

अभ -३ का वर्ग हुआ = ९

पर हमें इसे दो डिजिट में लिखना है क्यु की हमारा पहला पार्ट दो डिजिट में है.

इस लिए -३ का वर्ग = ०९

इस लिए (४७)२  = २२०९

Ex. 2

(41)2

४१ ये ५० से ९ कम है इस लिए २५ में से हम ९ कम करेंगे.

२५-९ = १६

ये हमारे उत्तर का पहला पार्ट हुआ.

अभ -९ का वर्ग होता है = ८१

इसे दो डिजिट में करने की कोई आवश्यकता नही. क्यु की पहले से ही दो डिजिट में ही है.

तो हमारा पहला पार्ट = १६

दूसरा पार्ट = ८१

इस लिए (४१)२ = १६८१

Ex. 3

(३७)२

३७ ये ५० से १३ कम है इस लिए.

२५-१३ = १२

१२ ये हमारे उत्तर का पहला पार्ट हुआ.

-१३ का वर्ग = १६९

यहाँ पर कंडीशन कुछ ऐसी है की, जभ हमारे उत्तर का पहला पार्ट दो डिजिट्स में है तो आखिर का पार्ट दो डिजिट्स में ही होना चाहिए.

अभ यहाँ पर दुसरे पार्ट में १६९ में ३ डिजिट है.

तो हम पहले पार्ट १२ में हम दुसरे पार्ट के १६९ का १ यहाँ पर ऐड करते है.

मतलब हमारा पहला पार्ट हुआ १२+१ = १३

और दूसरा पार्ट हुआ = ६९

इस लिए (३७)२ = १३६९

Ex. 4

(३४)२

३४ ये ५० से १६ कम है इस लिए.

२५-१६ = ९

९ ये हमारे उत्तर का पहला पार्ट हुआ.

-१६ का वर्ग = २५६

अभ हमारे रूल के मुताबित जभ पहले पार्ट में दो डिजिट्स है तो दुसरे पार्ट में भी दो डिजिट्स होने ही चाहिए.

पहला पार्ट = ९+२५६ का २ = ११

= ११५६

इस लिए (३४)२ = ११५६

क्या साथियों,

कैसी लगी आप को ये जादुई ट्रिक?

मुजे पूरी तरह उम्मीद है की, आप को ये ट्रिक बहुत पसंद आई होगी.

इसी तरह जादा से जादा वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक का खजाना प्राप्त करने के लिए आप हमारे ब्लॉग से अवश्य जुड़िये.

http://www.numericallyyours.wordpress.com

साथियों,

आप को ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे जरुर like कीजिये.

आप का कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमें जरुर कमेंट कीजिये.

उस का रिप्लाई आप को निश्चित मिलेगा.

इस पोस्ट को आप जितना हो सखे उतना प्लीज प्लीज प्लीज  शेयर कीजिये. व्हात्सप, फेसबुक. इन्स्ताग्राम, ट्विटर आदि पर.

इस से आप का तो नॉलेज बढेगा ही बढेगा साथ ही साथ औरो की मदद भी होगी.

जभ औरो की मदद होगी तभ वो सभ आप को दुवाओ में याद रखेंगे.

आप अपने क्वेरी का समाधान ईमेल और व्हात्सप्प के जरिये प्राप्त कर सखते है.

ईमेल: (devendramaytree999888@gmail.com)

व्हात्सप्प पर आप (८६९१८५८५२४) इस नंबर पर आप का नाम और आप जिस शहर से बात कर रहे है वो बता कर अपनी क्वेरी रख दीजियेगा.

तो साथियों,

मैं देवेन्द्र आप्प से बहुत ही शीघ्र मिलूँगा के अद्भुत और चमत्कारिक वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक लेकर.

जभ तक के लिए आप सभी बने रहिएगा हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours ब्लॉग पर देवेन्द्र के साथ.

प्रणाम.

post102

हेल्लो प्यारे प्यारे साथियों,

आप सभी को देवेन्द्र का सप्रेम प्रणाम.

स्वागत है आप सभी का हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर एक अद्भुत धमाकेदार वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ.

Square Vedic tricks

Series 1

साथियों, मैं देवेन्द्र आप सभी के  साथ हाजिर हुआ हु एक अद्बुत चमत्कारिक वैदिक मैथ्स मैजिकल कांसेप्ट के साथ.

अर्थात आज हम square वर्ग के कांसेप्ट के वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के बारे में जानेंगे.

साथियों, आज इस पोस्ट में हम जानेंगे की, किसी भी २दिजित के नंबर का वर्ग निकालने की विधि.

आइये साथियों, हम कुछ उदाहर्नो द्वारा इस ट्रिक को समजते है.

Ex. 1

८६ का वर्ग

८६ में ८ और ६ ये दो डिजिट्स है.

८ का वर्ग = ६४

८*६*२ = ९६

६४+९६ का ९ कैर्री और ६ जैसे का तैसा

= ७३६

६ का वर्ग = ३६

७३६+३६ का ३ कैर्री और ६ जैसे का तैसा

= ७३९६

इस लिए ८६ का वर्ग = ७३९६

Ex. 2

६९ का वर्ग

६९ में ६ और ९ ये दो डिजिट्स है.

६ का वर = ३६

६*९*२

= १०८

३६+१०८ का १० कैर्री और ८ जैसे का तैसा.

= ४६८

९ का वर्ग = ८१

४६८+८१ का ८ कैर्री और १ जैसे का तैसा.

= ४७६१

इस लिए ६९ का वर्ग = ४७६१

किसी भी वर्ग नंबर को दर्शित करने के लिए (जिस नंबर का वर्ग निकालना है वो नंबर)२

ऐसे लिखा जाता है.

अथवा मान लो हमें ६९ का वर्ग इसे दर्शित करना हो ६९^२ ऐसे  लिखा जाता है.

Ex. 3

(७८)२

७^२ = ४९

७*८*२

= ११२

४९+११२ का ११ कैर्री और २ जैसे का तैसे.

= ६०२

८^२ = ६४

६०२+६४ का ६ कैर्री और ४ जैसे का तैसा.

= ६०८४

इस लिए ७८^२ = ६०८४

Ex. 4

९१^२

९^२ = ८१

९*१*२

= १८

८१+१८ का १ कैर्री और ८ जैसे का तैस्से.

= ८२८

१^२ = १

= ८२८१

इस लिए ९१^२ = ८२८१

क्या साथियों?

कैसी लगी आप को आज की ये ट्रिक?

साथियों, मुजे पूरी उम्मीद है आप को ये ट्रिक जरुर पसंद आई होगी.

इसी तरह जादा से जादा वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक का खजाना प्राप्त करने के लिए आप हमारे ब्लॉग से अवश्य जुड़िये.

http://www.numericallyyours.wordpress.com

साथियों,

आप को ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे जरुर like कीजिये.

आप का कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमें जरुर कमेंट कीजिये.

उस का रिप्लाई आप को निश्चित मिलेगा.

इस पोस्ट को आप जितना हो सखे उतना प्लीज प्लीज प्लीज  शेयर कीजिये. व्हात्सप, फेसबुक. इन्स्ताग्राम, ट्विटर आदि पर.

इस से आप का तो नॉलेज बढेगा ही बढेगा साथ ही साथ औरो की मदद भी होगी.

जभ औरो की मदद होगी तभ वो सभ आप को दुवाओ में याद रखेंगे.

आप अपने क्वेरी का समाधान ईमेल और व्हात्सप्प के जरिये प्राप्त कर सखते है.

ईमेल: (devendramaytree999888@gmail.com)

व्हात्सप्प पर आप (८६९१८५८५२४) इस नंबर पर आप का नाम और आप जिस शहर से बात कर रहे है वो बता कर अपनी क्वेरी रख दीजियेगा.

आइये साथियों, एक कविता की हम सैर करते है.

जीवन क्या है?

तुषार रस्तोगी|

void(0);

void(0);

जीवन, प्रभु की लिखी सुन्दर कविता है

जीवन, खुद के लिए स्वयं लिखी गीता है 

जीवन, गर्मी की रात में आती कंपकंपी है

जीवन, मुश्किलातों में मिलती थपथपी है 

जीवन, कानों के बीच का अंतरिक्ष है

जीवन, गालों के बीच खिलता वृक्ष है 

जीवन, गीत है जिसे हर कोई सुनता है

जीवन, सपना है जो हर कोई बुनता है 

जीवन, मधुर यादों का बहता झरना है

जीवन, प्यारी बातों को जेब में भरना है 

जीवन, अपनों से जी भरकर लड़ना है

जीवन, सही के लिए गलत से भिड़ना है 

जीवन, झूठ-मूठ का रूठना-मनाना है 

जीवन, ज्यादा सा खोना जरा सा पाना है 

जीवन, स्थान है जिसे सिर्फ आप जानते हैं 

जीवन, ज्ञान है जिसे सिर्फ आप मानते हैं 

जीवन, बर्फ के बीच से उगती कुशा है

जीवन, बहकते पल में मिलती दिशा है 

जीवन, प्रेयसी के हाथों का छूना है

जीवन, पान पर लगा कत्था-चूना है 

जीवन, रेत में पिघलता एक महल है 

जीवन, इंसानी किताब की रहल है 

जीवन, गले में अटकी एक मीठी हंसी है 

जीवन, जान में लिपटी बड़ी लंबी फंसी है 

जीवन, दमदार हौसलों से दौड़ती रवानी है 

जीवन, मासूम बच्चों से बढ़ती कहानी है 

जीवन, कभी खामोश ना रहने वाली खुशी है 

जीवन, ‘निर्जन’ युद्ध है जहां योद्धा ही सुखी है। 

तो साथियों, मैं देवेन्द्र आप से बहुत जल्द से जल्द ही मिलूँगा एक अद्भुत धमाकेदार वैदिक मैथ्स मैजिकल ट्रिक के साथ,

जभ तक आप सभी बने रहिएगा हमारे अपने प्यारे प्यारे numerically yours इस ब्लॉग पर देवेन्द्र के साथ.

साथियो, अभ इमुज़े इस पोस्ट से दीजिये इजाजद.

नमश्कार.